Derivative Market क्या होता है ?

Derivative Market क्या होता है ?

नमस्कार दोस्तों, Bazaareducation में आपका स्वागत है। आज हम इस Article में Derivative Market क्या होता है ? इस बारे में Complete Details में जानने वाले हैं।

जैसे कि ;- 1. Derivative Market क्या होता है ?

2. Derivatives कितने प्रकार के होते हैं ? 

3. Derivative Market में Hedgers, Speculators, और Arbitrageurs कौन होते हैं ?

4. Commodity Derivatives क्या होते हैं ?

5. Financial Derivatives क्या होते हैं ?

6. Over-The-Counter (OTC) Derivatives क्या होते हैं ?

7. Exchange-Traded Derivatives क्या होते हैं ?

1. Derivative Market क्या होता है ?

Derivative Market एक ऐसी जगह होती है, एक ऐसा “Marketplace” होता है जहाँ पर दो या दो से अधिक लोगों के बीच में किसी Asset, Commodity, Currency या Security को खरीदने और बेचने का आपस में Financial Contract होता है। दोस्तों, ऐसी जगह को ही हम Derivative Market कहते हैं।

Derivative एक प्रकार का Financial Contract होता है, एक प्रकार का Financial दस्तावेज़ होता है जिसकी Value किसी अन्य वस्तु या चीज़ पर Depend करती है, और जिस वस्तु या चीज़ पर उसकी Value Depend करती है, उसे हम उस Derivative का “Underlying Assets” कहते हैं। बिना उस Underlying Assets के, उस Derivative की अपने आप में कोई Value नहीं होती है।

Derivatives और Underlying Assets क्या होते हैं ?, चलिए इसे हम एक Example के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं।

मान लेते हैं कि एक “Bazaareducation” नाम की कंपनी है, जिसके शेयर की Current में Market Price 100 रुपये चल रही है।

अब मान लेते हैं कि कोई श्याम नाम का एक ट्रेडर है, जिसे उस कंपनी के Fundamentals, Chart History, और Market के Sentiment को देखकर लगता है कि आगे आने वाले एक महीने में इस Bazaareducation कंपनी के शेयर की Price 100 रूपये से बढ़कर 130 रूपये तक पहुंच सकती है। इसलिए, वह उस कंपनी के 10,000 शेयर्स खरीदने के बारे में सोचता है, लेकिन, वह अभी उन 10,000 शेयर्स को नहीं खरीदना चाहता है। वह चाहता है कि एक महीने बाद ही कोई उसे इस कंपनी के 10,000 शेयर्स 100 रुपये की कीमत में ही उपलब्ध करा दे। और वह उन 10,000 शेयर्स को 130 रुपये की कीमत में बेचकर Profit कमा ले।

दोस्तों, अब मान लेते हैं कि कोई राहुल नाम का एक दूसरा ट्रेडर है, जिसे उसी कंपनी के Fundamentals, Chart History, और Market के Sentiment को देखकर लगता है कि इस कंपनी के शेयर की कीमत अब 100 रुपये से और ज्यादा नहीं बढ़ने वाली है। उसे लगता है कि आगे आने वाले समय में इस कंपनी के शेयर की कीमत 100 रुपये से घटकर 80 रुपये हो जाएगी। इसलिए, राहुल नाम का ट्रेडर उस कंपनी के 10,000 शेयर्स को Short करना चाहता है, मतलब कि राहुल नाम का ट्रेडर उस कंपनी के 10,000 शेयर्स को 100 रुपये की कीमत में बेचना चाहता है।

दोस्तों, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि Market में सभी Investors और Traders का Market और Companies को लेकर अलग-अलग Point Of View (दृष्टिकोण) होता है। इसलिए, Market में एक Trader एक Price पर किसी कंपनी के शेयर्स को बेच रहा होता है क्योंकि उसे लगता है कि यहां से इस कंपनी के शेयर की Price नीचे जाएगी। और दूसरी तरफ, दूसरा Trader उसी Price पर उसी कंपनी के शेयर्स को खरीद रहा होता है क्योंकि उसे लगता है कि यहां से इस कंपनी के शेयर की Price और ऊपर जाएगी। तो इस तरह से Market में सभी Investors और Traders का Market और Companies को लेकर अलग-अलग Point Of View (दृष्टिकोण) होता है।

तो दोस्तों, ऐसी Situation में, राहुल नाम का ट्रेडर श्याम नाम के ट्रेडर से कहता है कि तुम एक महीने बाद उस Bazaareducation कंपनी के 10,000 शेयर्स 100 रूपये की Price में मुझसे खरीद लेना। चाहे उस समय उसके शेयर की कीमत कितनी भी हो, मैं तुम्हें एक महीने बाद उस Bazaareducation कंपनी के 10,000 शेयर्स 100 रुपये की कीमत में उपलब्ध करा दूंगा।

इसके लिए श्याम और राहुल नाम के ट्रेडर्स आपस में एक Contract (अनुबंध) साइन करते हैं, जिसमें उस Contract का Time Period, मतलब कि कितने दिनों के लिए वह Contract किया गया है, वो और शेयर्स की संख्या और शेयर की प्राइस लिखी होती है, जिस प्राइस पर वह Contract तय किया गया है।

दोस्तों, यह जो श्याम और राहुल नाम के ट्रेडर्स के बीच Bazaareducation कंपनी के 10,000 शेयरों का Contract हुआ है, Actually में यह Contract ही Derivative है। जिसकी अपने आप में कोई वैल्यू नहीं होती है। क्योंकि यह बस एक कागज का टुकड़ा होता है। जिसकी Value उस कंपनी के शेयर्स पर Depend करती है, जो कि इस Derivative का Underlying Asset है। क्योंकि इस Contract को जो Value मिल रही है, वह उस Bazaareducation कंपनी के शेयर्स से ही मिल रही है।

मान लीजिए कि आगे आने वाले एक महीने के अंदर किसी भी Internal Reason के कारण वह Bazaareducation कंपनी डूब जाती है या बंद हो जाती है, तो क्या बाद में भी इस Contract की अपने आप में कोई वैल्यू होगी ? नहीं ना।

दोस्तों, इस Contract के Last Time तक अगर Bazaareducation कंपनी के शेयर की प्राइस 100 रुपये से बढ़कर 130 या 140 रुपये हो जाती है, तो इस Situation में श्याम नाम के Trader को Profit होगा। और अगर Contract के Last Time तक Bazaareducation कंपनी के शेयर की प्राइस 100 रुपये से घटकर 70 या 80 रुपये हो जाती है, तो इस Situation में राहुल नाम के ट्रेडर को Profit होगा।

नोट:- इस Example में आप शेयर्स की जगह किसी भी अन्य Asset, Commodity, Currency या Security को भी ADD कर सकते हैं, जैसे कि ;- USD/INR, EUR/INR, GBP/INR, JPY/INR, Gold, Silver, Energy, Oil, Spices, Wheat, Rice, Cotton आदि।

दोस्तों, यह केवल एक काल्पनिक उदाहरण है। मुझे उम्मीद है कि आपको इस उदाहरण के माध्यम से समझ में आ गया होगा कि “Derivatives और Underlying Assets” क्या होते हैं।

2. Derivatives कितने प्रकार के होते हैं ? 

Derivatives सामान्यतः चार प्रकार के होते हैं।

1. Forward Derivative (फॉरवर्ड डेरीवेटिव)
2. Future Derivative (फ्युचर डेरीवेटिव)
3. Option Derivative (ऑप्शन डेरीवेटिव)
4. Swap Derivative (स्वैप डेरीवेटिव)

आगे आने वाले Articals में हम इन सभी Derivatives के बारे में एक-एक करके विस्तार से जानेंगे।

3. Derivative Market में Hedgers, Speculators, और Arbitrageurs कौन होते हैं ? 

Derivative Market में तीन प्रकार के लोग ट्रेडिंग करते हैं, जिन्हें हम Hedgers, Speculators, और Arbitrageurs कहते हैं।

Hedgers

Hedgers वह लोग होते हैं जो बाजार में किसी Assets, Commodities, Currencies या Securities की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के Risk से खुद को बचाने के लिए Derivative Market में ट्रेड करते हैं। उन्हें हम ‘Hedgers’ कहते हैं।

चलिए, इसे हम एक Example के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं कि “Hedgers” कौन होते हैं।

मान लेते हैं कि एक सुरेश नाम का किसान है, जिसके खेत में प्रतिवर्ष सैंकड़ों क्विंटल गेहूँ की पैदावार होती है।

और दूसरी तरफ, मान लेते हैं कि एक नूडल्स बनाने वाली ABC Limited नाम की कंपनी है।

सुरेश को हर साल इस बात का डर रहता है कि कहीं इस साल गेहूँ की कीमतें कम ना हो जाए।

और दूसरी तरफ, नूडल्स बनाने वाली ABC Limited नाम की कंपनी को इस बात का डर रहता है कि कहीं इस साल गेहूँ की कीमतें बढ़ ना जाए।

तो, इस Situation में, सुरेश और नूडल्स बनाने वाली ABC Limited नाम की कंपनी बाजार में गेहूँ की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के Risk से खुद को बचाने के लिए आपस में एक Contract साइन कर सकते हैं।

दोस्तों, Derivative Market में जो लोग किसी Asset, Commodity, Currency या किसी Security की Prices में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के Risk से खुद को बचाने के लिए इस तरह के Contract करते हैं, उन्हें हम Hedgers कहते हैं।

दोस्तों, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि इस तरह के Contract किसी बीच की Price पर फिक्स होते हैं, जिस Price पर न तो सामने वाली Party को सामान बेचने में कोई नुकसान होता है और न ही दूसरी Party को सामान खरीदने में कोई नुकसान होता है। दोस्तों, इस तरह के Contract करने के बाद, दोनों पार्टियाँ बाजार में वस्तुओ और चीजों की Prices में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के Risk से खुद को बचा लेती हैं।

Speculators

Speculators वह लोग होते हैं जो बाजार में किसी Assets, Commodities, Currencies या Securities की Prices में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के बारे में अपनी एक राय बनाकर Derivative Market में ट्रेड करते हैं। यानि कि जो लोग Assumptions के Base पर Derivative Market में Trade करते हैं। उन्हें हम ‘Speculators’ कहते हैं।

चलिए, इसे हम ऊपर दिए गए Example के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं कि Speculators कौन होते हैं।

मान लेते हैं कि सुरेश और नूडल्स बनाने वाली ABC Limited नाम की कंपनी के बीच में 21 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ का Contract फिक्स हो जाता है।

अब मान लेते हैं कि दूसरी तरफ राजेश नाम का एक ट्रेडर है जिसको Climate Change और Weather Reports को देखकर लगता है, कि इस साल गेहूँ की पैदावार कम हो सकती है, जिसके कारण उसकी कीमतें काफी बढ़ सकती है। राजेश को लगता है कि इस साल गेहूँ की कीमतें 25 या 26 रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती है।

इसलिए, राजेश सुरेश या किसी अन्य किसान के साथ 21 रूपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ का एक Contract साइन कर लेता है। क्योंकि किसी भी किसान को 21 रूपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ बेचने में कोई नुकसान नहीं हो रहा है। और इसके अलावा, किसानों को जो डर है कि कहीं फसल निकाले तब तक गेहूँ की कीमतें 21 रूपये प्रति किलोग्राम से नीचे न आ जाए, फिर उनको Price Fluctuations (कीमतों में उतार-चढ़ाव) का वह डर भी नहीं रहेगा। इसलिए वे राजेश के साथ 21 रूपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ का Contract साइन कर लेते हैं।

दोस्तों, मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यहाँ पर राजेश को यह पक्का पता नहीं है कि इस साल गेहूँ की कीमतें 25 या 26 रुपये प्रति किलोग्राम होगी ही। वह बस Climate Change और Weather Reports को देखकर इस बारे में अपनी एक राय बना रहा है, अर्थात राजेश यहाँ पर केवल अपने Analysis के आधार पर Assume कर रहा है कि इस साल गेहूँ की कीमतें 25 या 26 रुपये प्रति किलोग्राम तक जा सकती हैं।

तो दोस्तों, Derivative Market में जो लोग इस तरह से Assumptions के Base पर Contract करते हैं, उन्हें हम ‘Speculators’ कहते हैं।

दोस्तों, इस Example में राजेश एक Speculator है और जिन किसानों ने राजेश के साथ यह Contract साइन किया था, वे Hedgers हैं क्योंकि उन्होंने बाजार में गेहूँ की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के Risk से खुद को बचाने के लिए राजेश के साथ यह Contract साइन किया था।

Arbitrageurs 

Arbitrageurs वह लोग होते हैं जो बाजार में किसी Assets, Commodities, Currencies या किसी Securities के दो Prices के बीच के Difference से पैसा कमाने के लिए Derivative Market में ट्रेड करते हैं। उन्हें हम ‘Arbitrageurs’ कहते हैं।

चलिए, इसे हम एक Example के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं कि Arbitrageurs कौन होते हैं।

मान लेते हैं कि एक “A” नामक शहर या राज्य है, जहाँ पर किसानों और मंडी खरीदारों के बीच में 21 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ का एक कॉन्ट्रैक्ट हो रहा है।

और मान लेते हैं कि एक दूसरा “B” नामक शहर या राज्य है, जहाँ पर ठीक वैसे ही किसानों और मंडी खरीदारों के बीच में गेहूँ का एक कॉन्ट्रैक्ट हो रहा है, पर वहाँ पर किसानों और मंडी खरीदारों के बीच में 21 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ का कॉन्ट्रैक्ट नहीं हो रहा है, वहाँ पर 25 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ का कॉन्ट्रैक्ट हो रहा है।

अब मान लेते हैं कि रमेश नाम का एक ट्रेडर है, जिसको गेहूँ के इस Price Difference के बारे में पता चलता है। तो दोस्तों इस Situation में, रमेश दोनों स्थानों पर एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करेगा। वह सबसे पहले “A” नामक शहर या राज्य के किसानों के साथ 21 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ को खरीदने का एक Contract साइन करेगा। और बाद में, वह “B” नामक शहर या राज्य के मंडी खरीदारों के साथ 25 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूँ को बेचने का एक Contract साइन करेगा। और इस तरह, दोनों जगहों के बीच में गेहूँ का जो Price Difference है, उससे वह बिना किसी Risk के पैसे कमाएगा।

दोस्तों, इस तरह से जो लोग Derivative Market में Trade करते हैं, उन्हें हम ‘Arbitrageurs’ कहते हैं।

4. Commodity Derivatives क्या होते हैं ? 

Commodity Derivatives का मतलब होता है कि वे Derivatives जिनका Underlying Asset कोई भौतिक वस्तु होती है, जैसे कि Gold, Silver, Energy, Oil, Spices, Wheat, Rice, Cotton आदि, उन्हें हम Commodity Derivatives कहते हैं।

5. Financial Derivatives क्या होते हैं ? 

Financial Derivatives का मतलब होता है कि वे Derivatives जिनका Underlying Asset कोई Instrument (वित्तीय यंत्र) होता है, जैसे कि Shares, Bonds, Interest Rates, आदि, उन्हें हम Financial Derivatives कहते हैं।

6. Exchange-Traded Derivatives क्या होते हैं ? 

Exchange-Traded Derivatives का मतलब होता है कि वे Derivatives जिनको हम Exchange के माध्यम से Buy और Sell कर सकते हैं, उन्हें हम Exchange-Traded Derivatives कहते हैं।

जैसे कि Stock Market में हम किसी Listed कंपनी के शेयर्स को Exchange के माध्यम से Buy और Sell करते हैं, ठीक उसी प्रकार जिन Derivatives को हम Exchange के माध्यम से Buy और Sell कर सकते हैं, उन्हें हम Exchange-Traded Derivative कहते हैं।

Exchange-Traded Derivatives में Exchange Buyers और Sellers के बीच में एक Mediator के रूप में काम करता है।

7. Over-The-Counter (OTC) Derivatives क्या होते हैं ? 

Over-The-Counter (OTC) Derivatives में, दो पार्टियाँ बिना किसी Mediator जैसे कि Exchange को Involve किए बिना, आपस में एक दूसरे के साथ एक फिक्स Time Period के लिए और एक फिक्स Price पर किसी वस्तु या चीज़ को लेकर एक Contract साइन करती हैं, तो उसे हम Over-The-Counter (OTC) Derivatives कहते हैं।

अगर आसान शब्दों में कहाँ जाए, कि Over-The-Counter (OTC) Derivatives क्या होते हैं, तो इसे हम ऐसे कह सकते हैं कि जिन Derivatives को हम Exchange के माध्यम से Buy और Sell नहीं कर सकते हैं, उन्हें हम Over-The-Counter (OTC) Derivatives कहते हैं।

Over-The-Counter (OTC) Derivatives में, हमें Personally तौर पर सामने वाली Party से मिलना होता है और उनसे मिलकर बातचीत के माध्यम से एक फिक्स Price पर और एक Fix Time Period के लिए Contract को तय करना होता है, और बाद में उस फिक्स Time Period के अंदर ही हमें उस Contract को पूरा करना होता है।

Important Points

  • Derivative Market एक ऐसा “Marketplace” होता है जहाँ पर दो या दो से अधिक लोगों के बीच में किसी वस्तु या चीज को खरीदने और बेचने का आपस में Financial Contract होता है। दोस्तों, ऐसी जगह को ही हम Derivative Market कहते हैं।
  • Derivatives मुख्यत: चार प्रकार के होते हैं, जैसे कि Forward Derivative, Future Derivative, Option Derivative, और Swap Derivative आदि।
  • Derivative Market में तीन प्रकार के लोग ट्रेडिंग करते हैं, जिन्हें हम Hedgers, Speculators और Arbitrageurs कहते हैं।
  • Hedgers वह लोग होते हैं जो बाजार में वस्तुओं और चीजों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के Risk से खुद को बचाने के लिए Derivative Market में ट्रेड करते हैं। उन्हें हम ‘Hedgers’ कहते हैं।
  • Speculators वह लोग होते हैं जो बाजार में वस्तुओं और चीजों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव (Price Fluctuations) के बारे में अपनी एक राय बनाकर Derivative Market में ट्रेड करते हैं। यानि कि जो लोग Assumptions के Base पर Derivative Market में Trade करते हैं। उन्हें हम ‘Speculators’ कहते हैं।
  • Arbitrageurs वह लोग होते हैं जो बाजार में किसी वस्तु या चीज की दो Prices के बीच के Difference से पैसा कमाने के लिए Derivative Market में ट्रेड करते हैं। उन्हें हम ‘Arbitrageurs’ कहते हैं।
  • Derivative Contract का उपयोग कई कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि Speculation के लिए, Portfolio को Hedge करने के लिए, और Portfolio को Diversify करने के लिए।
  •  Derivative Market को हम “Futures And Options (F&O) Market” के नाम से भी जानते हैं।
  • Derivative Market में जब हम किसी कंपनी के शेयर्स को खरीदते हैं, तो हम उन शेयर्स को हमेशा के लिए अपने पास Hold करके नहीं रख सकते हैं। जैसा कि Equity Market में होता है। Derivative Market में हम उन शेयर्स को केवल तब तक अपने पास Hold करके रख सकते हैं जितने दिनों का हमने वह Contract किया है।
  • Derivative Market में, हम कंपनियों के जितने चाहें उतने शेयर्स खरीदकर ट्रेडिंग नहीं कर सकते हैं, जैसा कि हम Equity Market में करते हैं। Derivative Market में हमें कंपनियों के शेयर्स के Lots को खरीदना होता हैं, और प्रत्येक कंपनी के शेयर्स का Lot Size भी अलग-अलग होता है। किसी कंपनी के एक Lot में 250 शेयर्स हो सकते हैं, किसी कंपनी के एक Lot में 300 शेयर्स हो सकते हैं, तो किसी कंपनी के एक Lot में 500 शेयर्स हो सकते हैं।
  • Derivative Market में जब हम किसी कंपनी के शेयर्स को खरीदते हैं, तो उसका यह मतलब नहीं होता है कि हम उस कंपनी में हिस्सेदारी खरीद रहे हैं। क्योंकि Derivative Market में हम Actually में उस कंपनी के शेयर्स को नहीं खरीद रहे होते हैं। हम बस कुछ समय के लिए उन शेयर्स का एक कॉन्ट्रैक्ट कर रहे होते हैं। कंपनियों में हमें तभी हिस्सेदारी मिलती है जब हम Equity Market में किसी कंपनी के शेयर्स को खरीदते हैं।
  • Derivative Market में हम कंपनियों के शेयर्स को Long और Short दोनों कर सकते हैं और जितने दिन का कॉन्ट्रैक्ट होता है, उतने दिन के लिए उन्हें हम अपने पास Hold करके रख सकते हैं।
  • Derivative Market में, खास तौर पर Futures And Options में हमें प्रत्येक सौदे (Trade) का Settlement महीने के Last गुरुवार तक करना होता है।
  • Derivative Market में हम केवल Margin Money देकर किसी भी कंपनी के शेयर्स को खरीद और बेच सकते हैं और उनको Contract के Last दिन तक अपने पास Hold करके भी रख सकते हैं। Margin Money का मतलब होता है कि अगर हमें किसी कंपनी के शेयर्स का एक Lot खरीदना है जिसकी कीमत 2 लाख रुपये है, तो हम केवल 40,000 रुपये देकर उस कंपनी के शेयर्स का एक Lot खरीद सकते हैं।

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So I Hope कि आपको समझ में आ गया होगा कि Derivative Market क्या होता है ? तो आपको Derivative Market पर हमारा यह Article कैसा लगा, निचे Comments करके जरूर बताइयेगा।

धन्यवाद ।। ”

 

 

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